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मंगल से आए मंगल संदेश Mangal se aaye mangal sandesh
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा मंगल ग्रह पर भेजा गया
क्यूरियॉसिटी रोवर वहां से जिस तरह की सूचनाएं दे रहा है वे विश्व
वैज्ञानिक बिरादरी को चमत्कृत कर देने के लिए काफी हैं।
दो साल पहले जिस
स्थान पर यह उतरा था, वहां से आसपास की भौगोलिक स्थिति की तस्वीरें उसी समय
से मिलने लगी थीं। इन तस्वीरों से पता चला था कि वहां करीब 154 किलोमीटर
चौड़ा क्रेटर (उल्कापात से बना गड्ढा) है जिसके बीच में करीब 5 किलोमीटर
ऊंचा पहाड़ है। इस बीच खास बात यह हुई कि पृथ्वी से मिल रहे निर्देशों के
मुताबिक यह रोवर धीरे-धीरे अपनी जगह से चलकर पहाड़ की जड़ तक पहुंचा और उस
पर चढ़ने लगा।
पूरे दो वर्षों की चढ़ाई के बाद वह पहाड़ की चोटी तक जा पहुंचा और इस दौरान क्रेटर और पहाड़ की बनावट के बारे में ऐसी बारीक सूचनाएं भेजीं जो उपग्रहों द्वारा भेजे गए चित्रों से कभी हासिल नहीं की जा सकती थीं। इन सूचनाओं के विस्तृत विश्लेषण का काम वैज्ञानिक समुदाय आने वाले दिनों-वर्षों में करेगा। रोवर से ही आगे मिलने वाली सूचनाएं इस काम में वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन करेंगी। लेकिन, अभी तक मिल चुकी सूचनाएं भी कम क्रांतिकारी नहीं हैं।
इन सूचनाओं के आधार पर वैज्ञानिकों को लगता है कि करीब साढ़े तीन अरब साल पहले इस क्रेटर का ज्यादातर हिस्सा पानी से भरा रहा होगा। अगर यह बात सही है तो मंगल के क्लाइमेट के बारे में अब तक बनी इस धारणा पर सवाल उठ जाता है कि इस ठंडे और सूखे ग्रह पर उष्णता और आर्द्रता क्षणिक और स्थानीय बात ही रही होगी। बहरहाल, हर नई मान्यता अपने साथ सवालों का बवंडर भी लाती है।
पूरे दो वर्षों की चढ़ाई के बाद वह पहाड़ की चोटी तक जा पहुंचा और इस दौरान क्रेटर और पहाड़ की बनावट के बारे में ऐसी बारीक सूचनाएं भेजीं जो उपग्रहों द्वारा भेजे गए चित्रों से कभी हासिल नहीं की जा सकती थीं। इन सूचनाओं के विस्तृत विश्लेषण का काम वैज्ञानिक समुदाय आने वाले दिनों-वर्षों में करेगा। रोवर से ही आगे मिलने वाली सूचनाएं इस काम में वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन करेंगी। लेकिन, अभी तक मिल चुकी सूचनाएं भी कम क्रांतिकारी नहीं हैं।
इन सूचनाओं के आधार पर वैज्ञानिकों को लगता है कि करीब साढ़े तीन अरब साल पहले इस क्रेटर का ज्यादातर हिस्सा पानी से भरा रहा होगा। अगर यह बात सही है तो मंगल के क्लाइमेट के बारे में अब तक बनी इस धारणा पर सवाल उठ जाता है कि इस ठंडे और सूखे ग्रह पर उष्णता और आर्द्रता क्षणिक और स्थानीय बात ही रही होगी। बहरहाल, हर नई मान्यता अपने साथ सवालों का बवंडर भी लाती है।
अगर प्राचीन काल में मंगल की सतह पर इतनी भारी मात्रा में पानी था तो फिर
वहां जीवन की संभावना से इनकार कैसे किया जा सकता है? पुरानी मान्यताओं से
उलझना, उनमें से बहुतों को गलत साबित करना और इस प्रक्रिया में उपजे नए
सवालों की चुनौतियों से जूझना साइंस का नेचर रहा है। इस बार खास बात सिर्फ
यह है कि मनुष्य के भेजे एक दूत ने जिस तेजी से मंगल की दुनिया के राज
खोलने शुरू किए हैं, उसे देखते हुए लगता नहीं कि यह लाल ग्रह ज्यादा समय तक
हमारे लिए रहस्य का गोला बना रहेगा।
आइये जानते है मंगल ग्रह से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:-
1. मंगल ग्रह को “लाल ग्रह” के नाम से भी जाना जाता है।
2. मंगल ग्रह की सूर्य से औसतन दूरी लगभग 22 करोड़ 79 लाख किलोमीटर है।
3. मंगल ग्रह का व्यास तकरीबन 6794 किलोमीटर है।
4. “मार्च” महीने का नाम “मार्स” की तर्ज पर ही रखा गया है।
5. प्राचीन ग्रीक के लोग मानते थे की पृथ्वी ब्रम्हाण्ड का केंद्र है और मंगल ग्रह उन पांच सितारों में से एक है जो पृथ्वी की परिक्रमा करते है।
6. मंगल ग्रह के लाल होने का कारण वहाँ की मिट्टी में भारी मात्रा में मौजूद “Iron Oxide” है।
7. नानी लोग मंगल ग्रह को Ares(एरेस) कहते हैं और इसे युद्ध का देवता मानते हैं।
8. मंगल ग्रह की सूर्य के ईर्द-गिर्द कक्षा दिर्घवृत (अंडाकार) है। इसके कारण मंगल के तापमान में सूर्य से दूरस्तिथ बिंदु और निकटस्थ बिंदू के मध्य 30 डिग्री सेल्सीयस का अंतर है।
9. मंगल पर भेजे गए यानो की जानकारीयो की माने तो मंगल की सतह काफी पुरानी है तथा क्रेटरो से भरी हुई है। परन्तु कुछ नयी घाटीयां, पहाड़ीयां और पठार भी है।
10. मंगल पर भेजे यानो के द्वारा दिए गए आंकड़ो से साफ होता है कि मंगल पर बड़ी झीलें या सागर भी रहे होंगे।
11. हमारे सौर मंडल का सबसे ऊँचा पर्वत मंगल पर ही है। इसको “ओलिंप मोन्स” नाम दिया गया है और यह 24 किलोमीटर ऊँचा है।
12. मंगल ग्रह का औसतन तापामान -55 डिग्री सेल्सीयस है।
13. मंगल की सतह का तापमान 27 डिग्री सेल्सीयस से 133 डिग्री सेल्सीयस तक बदल सकता है।
14. मंगल ग्रह का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है।
15. मंगल का एक साल पृथ्वी के 687 दिनो के बराबर होता है।
16. मंगल गृह के दो उपग्रह हैं जिनके नाम फोबोस और डीमोस है।
17. अगर आपका वज़न पृथ्वी पर 100 किलो है तो मंगल ग्रह पर कम गुरूत्वाकर्षण की वजह से आपका वजन मात्र 37 किलोग्राम ही रह जाएगा।
18. आपको यह जानकार हैरानी होंगी की पृथ्वी पर 100 किलो वज़न वाले व्यक्ति का वज़न मंगल के उपग्रह “फोबोस” पर मात्र 100 ग्राम ही रह जाएगा।
19. मंगल के उपग्रह फोबोस का व्यास मात्र 22.2 किलोमीटर है।
20. मंगल ग्रह का राज जानने के लिए पूरी दुनिया में 8 अभियान काम कर रहे हैं। इन में से 7 अमेरिका द्वारा है और एक भारत द्वारा।
21. वैज्ञानिको की माने तो सन् 2022 से मंगल ग्रह पर घूमने जा सकते है जिसके लिए अभी तक 1,00,000 से भी ज़्यादा लोगो ने आवेदन दे दिया है।
22. मंगल ग्रह पर सूर्यास्त के समय आसमान नीला दिखाई देता है।
23. आपको यह जानकार हैरानी होंगी हॉलीवुड की ऑस्कर विजेता फिल्म “ग्रेविटी” भारत के मंगल अभियान से ज़्यादा महँगी थी।
24. करीब 4 अरब साल पहले मंगल ग्रह के वातावरण में भी ऑक्सीजन पाई जाती थी।
25. नासा के अनुसार मंगल ग्रह पर एक पत्र भेजने के लिए करीब $18,000 डॉलर का खर्च आता है। इससे आप मंगल ग्रह पर चल रहे अभियान के खर्च का अंदाजा लगा सकते है।
26. मंगल और पृथ्वी के बीच दूरी तकरीबन 40 करोड़ किमी की है।
Thanks for reading...
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आइये जानते है मंगल ग्रह से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:-
1. मंगल ग्रह को “लाल ग्रह” के नाम से भी जाना जाता है।
2. मंगल ग्रह की सूर्य से औसतन दूरी लगभग 22 करोड़ 79 लाख किलोमीटर है।
3. मंगल ग्रह का व्यास तकरीबन 6794 किलोमीटर है।
4. “मार्च” महीने का नाम “मार्स” की तर्ज पर ही रखा गया है।
5. प्राचीन ग्रीक के लोग मानते थे की पृथ्वी ब्रम्हाण्ड का केंद्र है और मंगल ग्रह उन पांच सितारों में से एक है जो पृथ्वी की परिक्रमा करते है।
6. मंगल ग्रह के लाल होने का कारण वहाँ की मिट्टी में भारी मात्रा में मौजूद “Iron Oxide” है।
7. नानी लोग मंगल ग्रह को Ares(एरेस) कहते हैं और इसे युद्ध का देवता मानते हैं।
8. मंगल ग्रह की सूर्य के ईर्द-गिर्द कक्षा दिर्घवृत (अंडाकार) है। इसके कारण मंगल के तापमान में सूर्य से दूरस्तिथ बिंदु और निकटस्थ बिंदू के मध्य 30 डिग्री सेल्सीयस का अंतर है।
9. मंगल पर भेजे गए यानो की जानकारीयो की माने तो मंगल की सतह काफी पुरानी है तथा क्रेटरो से भरी हुई है। परन्तु कुछ नयी घाटीयां, पहाड़ीयां और पठार भी है।
10. मंगल पर भेजे यानो के द्वारा दिए गए आंकड़ो से साफ होता है कि मंगल पर बड़ी झीलें या सागर भी रहे होंगे।
11. हमारे सौर मंडल का सबसे ऊँचा पर्वत मंगल पर ही है। इसको “ओलिंप मोन्स” नाम दिया गया है और यह 24 किलोमीटर ऊँचा है।
12. मंगल ग्रह का औसतन तापामान -55 डिग्री सेल्सीयस है।
13. मंगल की सतह का तापमान 27 डिग्री सेल्सीयस से 133 डिग्री सेल्सीयस तक बदल सकता है।
14. मंगल ग्रह का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है।
15. मंगल का एक साल पृथ्वी के 687 दिनो के बराबर होता है।
16. मंगल गृह के दो उपग्रह हैं जिनके नाम फोबोस और डीमोस है।
17. अगर आपका वज़न पृथ्वी पर 100 किलो है तो मंगल ग्रह पर कम गुरूत्वाकर्षण की वजह से आपका वजन मात्र 37 किलोग्राम ही रह जाएगा।
18. आपको यह जानकार हैरानी होंगी की पृथ्वी पर 100 किलो वज़न वाले व्यक्ति का वज़न मंगल के उपग्रह “फोबोस” पर मात्र 100 ग्राम ही रह जाएगा।
19. मंगल के उपग्रह फोबोस का व्यास मात्र 22.2 किलोमीटर है।
20. मंगल ग्रह का राज जानने के लिए पूरी दुनिया में 8 अभियान काम कर रहे हैं। इन में से 7 अमेरिका द्वारा है और एक भारत द्वारा।
21. वैज्ञानिको की माने तो सन् 2022 से मंगल ग्रह पर घूमने जा सकते है जिसके लिए अभी तक 1,00,000 से भी ज़्यादा लोगो ने आवेदन दे दिया है।
22. मंगल ग्रह पर सूर्यास्त के समय आसमान नीला दिखाई देता है।
23. आपको यह जानकार हैरानी होंगी हॉलीवुड की ऑस्कर विजेता फिल्म “ग्रेविटी” भारत के मंगल अभियान से ज़्यादा महँगी थी।
24. करीब 4 अरब साल पहले मंगल ग्रह के वातावरण में भी ऑक्सीजन पाई जाती थी।
25. नासा के अनुसार मंगल ग्रह पर एक पत्र भेजने के लिए करीब $18,000 डॉलर का खर्च आता है। इससे आप मंगल ग्रह पर चल रहे अभियान के खर्च का अंदाजा लगा सकते है।
26. मंगल और पृथ्वी के बीच दूरी तकरीबन 40 करोड़ किमी की है।
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