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अपनी जिन्दगी को दुखों से दूर रखने के लिए विवाह करने से पहले ही सही लड़की का चुनाव करें
अपनी जिन्दगी को दुखों से दूर रखने के लिए विवाह करने से पहले ही सही लड़की का चुनाव करें - शादी करना हर लड़के का सपना होता है शायद ही दुनियां में कोई ऐसा मिलेगा जो शादी नहीं करना चाहेगा। परन्तु इस मामले में कुछ सावधानियां भी रखना जरुरी है क्योंकि यदि किसी ऐसी लड़की से आपकी शादी हो गई जो संस्कारी नहीं है तो आपकी जिन्दगी मात्र एक कूड़ेदान बनकर रह जाती है और आपको इस पर बहुत पछताना पड़ सकता है।
उचित यही होता है कि विवाह करने से पहले ही सही लड़की का चुनाव करें। आज हम आपको बता रहे है कि सही लड़की का चुनाव किन बातों के आधार पर करें।
कैसी लड़की से विवाह करना चाहिए और कैसी लड़की से नहीं, इस संबंध में आचार्य चाणक्य बताया है कि-
वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्।
रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले।।
आचार्य चाणक्य ने कहा है कि समझदार मनुष्य वही है जो विवाह के लिए नारी की बाहरी सुंदरता न देखते हुए मन की सुंदरता देखे। यदि कोई उच्च कुल की कुरूप कन्या संस्कारी हो तो उससे विवाह कर लेना चाहिए। जबकि कोई सुंदर कन्या यदि संस्कारी न हो, अधार्मिक हो, नीच कुल की हो, जिसका चरित्र ठीक न हो तो उससे किसी भी परिस्थिति में विवाह नहीं करना चाहिए। विवाह हमेशा समान कुल में शुभ रहता है।
विवाह के बाद कन्या के गुण ही परिवार को आगे बढ़ाते हैं। जबकि सुंदर कन्या जो नीच कुल में पैदा हुई हो वो कन्या विवाह के बाद परिवार को तोड़ देती है। ऐसे लड़कियों का स्वभाव व आचरण निम्न ही रहता है। जबकि धार्मिक और ईश्वर में आस्था रखने वाली संस्कारी कन्या के आचार-विचार भी शुद्ध होंगे जो एक श्रेष्ठ परिवार का निर्माण करने में सक्षम रहती है।
नोट:- अगले पोस्ट में हम आपको बताएँगे कि शादी के लिए सही लड़के का चुनाव कैसे करें.. हमारे ब्लॉग को पढ़ते रहें..... धन्यवाद....
उचित यही होता है कि विवाह करने से पहले ही सही लड़की का चुनाव करें। आज हम आपको बता रहे है कि सही लड़की का चुनाव किन बातों के आधार पर करें।
कैसी लड़की से विवाह करना चाहिए और कैसी लड़की से नहीं, इस संबंध में आचार्य चाणक्य बताया है कि-
वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्।
रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले।।
आचार्य चाणक्य ने कहा है कि समझदार मनुष्य वही है जो विवाह के लिए नारी की बाहरी सुंदरता न देखते हुए मन की सुंदरता देखे। यदि कोई उच्च कुल की कुरूप कन्या संस्कारी हो तो उससे विवाह कर लेना चाहिए। जबकि कोई सुंदर कन्या यदि संस्कारी न हो, अधार्मिक हो, नीच कुल की हो, जिसका चरित्र ठीक न हो तो उससे किसी भी परिस्थिति में विवाह नहीं करना चाहिए। विवाह हमेशा समान कुल में शुभ रहता है।
विवाह के बाद कन्या के गुण ही परिवार को आगे बढ़ाते हैं। जबकि सुंदर कन्या जो नीच कुल में पैदा हुई हो वो कन्या विवाह के बाद परिवार को तोड़ देती है। ऐसे लड़कियों का स्वभाव व आचरण निम्न ही रहता है। जबकि धार्मिक और ईश्वर में आस्था रखने वाली संस्कारी कन्या के आचार-विचार भी शुद्ध होंगे जो एक श्रेष्ठ परिवार का निर्माण करने में सक्षम रहती है।
नोट:- अगले पोस्ट में हम आपको बताएँगे कि शादी के लिए सही लड़के का चुनाव कैसे करें.. हमारे ब्लॉग को पढ़ते रहें..... धन्यवाद....
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